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फ़रवरी 2008


ब्लॉग्स (33)
मइनत को नी मोल कईं कवाँ मोटा भईगिरवी छे रमझोल कईं कवाँ मोटा भईकरजो लइ नऽ फसल उगाड़ी, झट अइ गई वाण्या की गाड़ीकड़वा बोलऽ बोल कईं कवाँ मोटा भईकिस्त बैंक की भरनू बाकी, अरु बीमार छे गेंदा काकीपड्या खींचा मऽ होल कईं कवाँ मोटा भईव्हाँ सी व्हाँ तक एडू वाड़ो, कसो ... आगे पढ़ें...

जंगल काटी नऽ ढोयड़ा तू, मत भुई अपणी उजाड़भूक्यो तीस्यो मरी जासे रे, अपणों ई रंगी निमाड़हम भुई-माँय का छे दुधमुँहा, हम खऽ ऊ रोज धवाड़जओकाज स्तन खऽ काटाँगा तो, पड़गऽ बुरी लताड़द्रोपदी सी माटी-माँय की छे चुँदड़ी हरियालईदुश्शासन सो बणी नऽ मरीगा, मत कर तू ... आगे पढ़ें...

म्हारो नानो काळू अंग्रेजी का चार अक्षर काई पढ़ी गयोज,ओका दीमाग को पारो-सातवाँ आसमान पर चढ़ी गयोज।मनऽ ओका लेणऽ देखी थी भला घर की एक छोरी,काम धन्दा मऽ चतुर नऽ देखणा मऽ थी गोरीऊ ओखऽ पसंद नी आई-कैणऽ लग्यो ओकी तो-चपठी नाक छे, पिचकायेल गाल छेल।बड़ा-बड़ा डोळा छे नऽ ... आगे पढ़ें...