जंगल काटी नऽ ढोयड़ा तू, मत भुई अपणी उजाड़भूक्यो तीस्यो मरी जासे रे, अपणों ई रंगी निमाड़हम भुई-माँय का छे दुधमुँहा, हम खऽ ऊ रोज धवाड़जओकाज स्तन खऽ काटाँगा तो, पड़गऽ बुरी लताड़द्रोपदी सी माटी-माँय की छे चुँदड़ी हरियालईदुश्शासन सो बणी नऽ मरीगा, मत कर तू ...
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