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मन के भावैलाडू पेड़ा बरफीवी बीमार छेकतरो जपाँनीजर नी आवैकाँ! भगवानझट सी रूठीघर की रामप्यारीकसौ मनावागाँव को छेगँवार नी कहलावैअँगरेजी बोलेझाड़ काटीणेउपदेश लुटावैवृक्षप्रेमी छे।-प्रदीप शर्मा (नईदुनिया)