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मन के भावै


मन के भावै
लाडू पेड़ा बरफी
वी बीमार छे

कतरो जपाँ
नीजर नी आवै
काँ! भगवान

झट सी रूठी
घर की रामप्यारी
कसौ मनावा

गाँव को छे
गँवार नी कहलावै
अँगरेजी बोले

झाड़ काटीणे
उपदेश लुटावै
वृक्षप्रेमी छे।

-प्रदीप शर्मा (नईदुनिया)

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