हाथ में गेती
ने माथा पे तगारी
बाल मजूर।
अबे कां करें
मनक, मनक की
दुःख की बात।
रूप्या-पइसा
भरो-पूरो परबार
निराश्रत वी।
बालक मांजे
होटल में ठामड़ा
बूढ़ा भणे हे।
पेट काटीणे
औलाद के भणई
वो रोट नी दे।
अन्ना उगाय
सींचीणे परसीणो
भूख ती मरे।
-अशोक 'आनन' (नईदुनिया)

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