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पियर को हाल सुणा रे कागा


म्हारा आँगणा म आ रे कागा
पियर को हला सुणा रे कागा
चाँदी की थणे चोच घड़व्वा
ने हीरा हुण की थणे आँख्या
पीतल का थणे घड़व्वा
ने सुन्नाा की थणे पाँख्या
म्हारा आँगणाम आ रे कागा
पियर का हाल सुणा रे कागा
मूँगा की थणे खीर खड़व्वा
ने मोती हुण का थणे-मेवा
माखन ने मिश्री को 'रे कागा'
थणे करव्वाँ रोज-कलेवा
म्हारा आँगणा आ रे कागा
पियर का हाल सुणा रे कागा
पिरेम को पाटलो बिछइके
दूद-दई ती थणे न्हड़व्वा
मलियागिर का चन्दन को
टिल्लो थारा भाल चड़व्वा
म्हारा आँगणा आ रे कागा
पियर को हाल सुणा रे कागा।

- बंशीधर 'बंधु' (नईदुनिया)

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