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अपणो घर मत फोड़ो रे


अपणो घर मत फोड़ो रे,
मत माय-बाप खऽ छोड़ो रे
सरम जरा सी राखो तम,
मत बेसरमी चादर ओढ़ो रे।
अपणो घर मत फोड़ो रे॥
माय-बाप छे जान सी प्यारा,
हम उनकी छे आँख का तारा।
दिल उनको मत तोड़ो रे,
अपणो घर मत फोड़ो रे।
कसा उननऽ हमखऽ उछार्‌या,
ई वात नऽ खऽ
कदी मन मँऽ विचार्‌या?
करो सेवा बणो मत रोड़ो रे
अपणो घर मत फोड़ो रे।
बाप का छे डोका मँऽ पराण,
मांय बी छे चार दिन की मेजवान
मत बणऽ तू अवंऽ भगोड़ो रे,
अपणो घर मत फोड़ो रे।
नौ मयना तक वजन सेल्यो,
माय सी तू दुई साल सी नी बोल्यो।
बयरो को बण्यो तू घोड़ो रे,
अपणो घर मत फोड़ो रे।
वात जरा सी मंऽ
आल्लग रई रयाज,
दुनिया वाळा काई कई रयाज
फोकटई वात खऽ छोड़ो रे,
अपणो घर मत फोड़ो रे।

- महेश साकल्ये (नईदुनिया)

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