नाम अमरसिंग रखवा से कोई अमर नी होए,
मनख जिंदगी में आज मरिया ने कल दो दिन होए।
आँख पे पट्टी बाँधवा से जमानो अंधों नी होए।
एक बनिया का नी आवा से, हाठ मंदों नी होए।
जादू बोले माथे चढ़के, पाप बोले मगरा चढ़के,
इश्क और मुश्क की आग बुझावा से और भड़के
देखादेखी करवा से गाड़ी कदी आगे नी बढ़े,
सौबात की एक बात सिखाया पूतक चेरी नी चढ़े।
पर भारे लक्ष्मीनारायण करनो कीको नी भाए,
सगला चाए हींग लगे न फिटकारी रंग चोखो आए।
मजबूरी की मोज में कोई नी करे कोतई,
गरीब की लुगाई, आखा गाम की भोजाई।
मन नी चाए जदभी-मुंडो उगली दे हिरदा का हाल
जैसे नहाया का बाल और खाया का गाल।
मर्याबाद किने देखियो, यो संसार जीते जी को घेरो है,
कई नी धरियो है नाम में, आँक मिची के अँधेरो है।
- डॉ. देवेंद्र जोशी

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