Webdunia: Portal - Search - Mail - Greetings   More >>
Support | Font Download | Feedback
Search  
Welcome, Guest  [ Register | Sign In ]

खुणों मालवी-निमाड़ी को


नवा नवा छोरा नऽ की,

नवी नवी बात

चार किताब ऽ काई भणी गयो

घणोजऽचेन्दराजऽ।

खाटलाप ऽ बठी न ऽ

रोटा मचकाबज

नखराली बैरो सरको

नखरा बतावजऽ

अवन्दो सवन्दो बोली नऽ

खुबज ऽ उतमाजऽ।

काई मालुम कन्यागसी

कई आयोफटफटी

बैरोखऽबठाडी न ऽ

लईजजऽखरगुण को बजार

नान्हा नान्हा लेकरु

देखताजऽरईजाजऽ।

वाण्याँ से लई आयो

पैसा उधार

इन्दौर सी लई आयो

टीबी को बुखार

धानमऽ वजाडत नऽ

खुब कुला मटकावजऽ

रातमऽ बैरोखऽ नाचणो

सिखाड़जऽ

मोटा भाई केखऽ

कयण जाऊ

असी, घर की या वातऽ॥

चार किताब...

-लक्ष्मीनारायण तिवारी (नईदुनिया)

अस्वीकरण