बीत्यो जूनो साल अब हुवो नवा बरस को आगमन।
गया बरसे की कराँ विदाई, और नवा को अभिनंदन॥
गया बरस...
किने हँसायो किने रुलायो, आगे जरा हिसाब कराँ।
उजड़्या हुआ चमन में कोई खिलतो तको गुलाब धराँ।
आओ मिलने खुशियाँ रोपाँ, और लगावाँ मधुबन।
गयो बरस...
दीन-दुःखी से प्रेम कराँ हम, पक्को कराँ इरादा के।
ऊके भुलई दाँ जो दुःख देवे काँटा सरका वादा के।
मन की सगली गाँठाँ खोलाँ, शुरू कराँ फिर नवजीवन॥
गया बरस...
जो खिर्र्या झाड़ से पीला पत्ता, उनके कुण संजोवे है
जिनको नी है कोई अपनो, कुण उनका संग हँसे ने रोवे है
भूलाँ सगली पिछली बाताँ, हँसी ने केवे है, विरहन।
गया बरस...
- विभा जैन 'विरहन' (नईदुनिया)

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