जंगल-जंगल, बैड़ी-बैड़ी टेसू फूल्याटेसू फूल्या नऽ, म्हारा मन झूल्या॥(१) सागवान खऽ देखो ओका पत्ता-पत्ता झड़ी गयाअनऽ अम्बा नऽ मौर नऽप म्हारा डोळा गड़ी गयाबर्रफ जसा ठंडा-ठंडा, दिन धूल्या,जंगल-जंगल, बैड़ी-बैड़ी टेसू फूल्या॥(२) म्हारा गाँव की नद्दी की बी, पीठ उघाड़ी ...
आगे पढ़ें...