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11 फ़रवरी, 2008


ब्लॉग्स (4)
दूर देस मंऽ जावाँ कसा,गीत खुसी का गावाँ कसा।नरबदा मैया खऽ छोड़ी नऽगाँव का खोदरा मंऽ न्हावाँ कसा।गया था घर सी कळो करी नऽ,घर मंऽ पछा आवाँ कसा।काँटा रस्ता मंऽ वाया उन नऽहम फूल बिछावाँ कसा।बीज बोबळ्‌या का वाया था,मीठो आँबो पावाँ कसा।सासू खऽ रोटा दीया नी कदी,वऊ ... आगे पढ़ें...

जंगल-जंगल, बैड़ी-बैड़ी टेसू फूल्याटेसू फूल्या नऽ, म्हारा मन झूल्या॥(१) सागवान खऽ देखो ओका पत्ता-पत्ता झड़ी गयाअनऽ अम्बा नऽ मौर नऽप म्हारा डोळा गड़ी गयाबर्रफ जसा ठंडा-ठंडा, दिन धूल्या,जंगल-जंगल, बैड़ी-बैड़ी टेसू फूल्या॥(२) म्हारा गाँव की नद्दी की बी, पीठ उघाड़ी ... आगे पढ़ें...

बदली गयो है अबे जमानो, अने बदली गया है लोग।माखन-मिश्री भूलो कान्हा, लगे है अब पिज्जा को भोग॥टीवी दादा की जै हो, भूली गया सगला खेल।पकड़म पाटी बी गई, ने अबे गई छुक-छुक रेल॥आखी दुनिया सामे है, जै कम्पुटर महाराज।एक जगे बैठा-बैठा, कर लो सगला काज॥बुरई-भलई मत ... आगे पढ़ें...