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मालवी मुक्तक


शिक्षा
फूल का खिलने से, खुशबू बिखरी जावे है।
चाँद का निकलने से चाँदनी निखरी जावे है।

तेवहार
हमारी संस्कृति की धरोहर है ई तेवहार।
भागमभाग में जीवन हुई गयो दुसवार।
मिलवा-जुलवा की फुरसत किने है आजकल,
ई तेवहार ईज तो, भेला करे है परिवार॥

कैसो जमानो
बात-बात पे हादसो, जिनगी को कँई ठिकानो।
देखता-देखता काँ जई, रियो है यो जमानो।
देश में तरक्की तो है, पण मन में शांति काँ है,
इससे तो अच्छो थो, जमानो जूनो-पुरानो॥

- विभा जैन (नईदुनिया)

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