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15 फ़रवरी, 2008


ब्लॉग्स (1)
इना बरस भी खूब बरस, म्हारा इंदर देवजी सरस। खेत जंगल न्हई रिया खाल-नाल बेवई रिया। मोर-पपैया कोयल मिली के मंगल गान सुनई रिया। इंदर धनुष देवे दरस। इना बरस भी खूब बरस। जईं देखो वईं हरयाली हरयाली माय खुशयाली। बेल बेलड़ी झाड़ चढ़या हवा नवा जीजा की साली। उकी बेग ... आगे पढ़ें...