महुवो घणो पाक्योज, तो गळज डोकरी, पण मन की मन, तू क्यँऊँ बळज डोकरी। जिनगी की तगारी मऽ, घणा पड्या झारा, समय का टकारा सी, ऊ झळज डोकरी। दुख की राखोड़ी सी, जेतरो जो मँजाण्यो, ऊ घड़ो ओतरो जाफा, उजळज डोकरी। हाँऊँ, नी वात मानतो, पण लोग असा कैज, भाग मऽ जो लिखेलो, ऊ ...
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