सीताफल का भाव, मऽ नारी वेचई रईज
नारी का बदन से, साड़ी वेचई रईज।
मूछ पऽ ताव दईन आँगणऽ बठ्या,
डोळा ना का सामनऽ लाड़ी वेचई रईज।
कार, मोबाइल ना नऽ धूम मचई दी,
लखौंडा नऽ सीमिट का जंगल ना मऽ,
खळा नऽ खेत वाड़ी वेचई रईज।
पेप्सी नऽ आइसक्रीम नऽ खोब लुभाया,
लेण्यो नीहाई, अम्बा की आड़ी वेचई रईज।
मिलऽ नी दुकान पऽ घाघरा-वन्नी 'प्रीति',
कपड़ा का नाव से नाड़ी वेचई रईज।
- डॉ. पार्वती व्यास 'प्रीति'

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