आवो आवो माय गणगौर,
धन भाग हमारा।
खुल्या खुल्या सबई दरबार,
खुल्या घर बार सारा॥
कंकू लगावां, चौखा चढ़ावां,
कापड़ो नारियल बधावाँ,
कराँ अरज घणी थारी,
माय तू खऽ पाटऽ बठाड़ाँ,
ननदी जावाँ, ढोल बजावाँ कराँ
घणा सिंगार तुम्हारा।
अईज बईण पीयर मऽ,
द्वार-द्वार खोब सजावाँ,
तीवार गणगौर प्यारो,
धूमधाम-सी हम मनावाँ,
नवी दिन तुम्हारा लगऽ रे,
सबई खऽ न्यारा।
रथ तुम्हारा कसा,
अँई-वँई नाचऽ डोलाजऽ,
खुशी मनावऽ सखी-सहेली नऽ, वात मन की बोलजऽ,
माथो नवावाँ माते माय खऽ,
कसा हरखावाँ सारा।
आवो आवो माय गणगौर,
धन भाग हमारा॥
- अखिलेश जोशी

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