देखो, उनको नाम हुई गयो,
प्रीत मऽ हऊँ बदनाम हुई गयो।
हमनऽ कसा महेल बणाया,
सुंदर ओमऽ बाग लगाया।
फूल तुमारो नाम हुई गयो,
काँटो हऊँ बदनाम हुई गयो।
देखो कसी सेज सजाई,
खुशबूभरी हवा भी आई।
नींद तुमारो नाम हुई गयो,
सपनो हऊँ बदनाम हुई गयो।
जो हमकऽ सपनो आयो,
कुछ कच्चो, कुछ झूठो आयो।
सच्चो थारो हाल हुई गयो,
हऊँ झूठो बदनाम हुई गयो।
जब थारो बुलावो आयो,
हऊँ भी दौड़्यो-दौड़्यो आयो।
शमां तुमारो नाम हुई गयो,
पतंगो हऊँ बदनाम हुई गयो।
- प्रमोद त्रिवेदी 'पुष्प'

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