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कसो जमानो उलटो आयो


कसो जमानो उल्टी आयो?

बरसतो पाणी रोकऽ नी

धरतीसी पाणी खैचऽ

बीजली का बिल सारु

बर्तन-भाँडा बेचऽ

धरती की खूसबू छोड़ी नऽ

लगावऽ अतर को फायो।

कसो जमानो उल्टो आयो...

गोरा-चिकना बेटा कऽ

माय-बाप का चाटऽ

बाप सीधी वात कय तो

घर छोड़ी नऽ न्हाटऽ

मयनतसी मुँडो मोड़ऽ

कर्जा मऽ खोब न्हायो।

कसो जमानो उल्टो आयो...

बुद्धिवाळा हाथ कटई नऽ

लगऽ जसा कई गया टुंडा

जगो-जगो कब्जो करी रयाज

खुल्लम-खुल्ला यी गुंडा

असा पुल सी गुजराँ हम

छे कच्चो जेको पायो।

कसो जमानो उल्टो आयो...

पूरब को सूरज छोड़ी नऽ

पच्छम मऽ हम भागाँ

कुंभकरण की नींद सोइ नऽ

बड़ी देर सी जागाँ

इमानदार की बात नी सुणऽ

बईमान का आगऽ घेंघायो।

कसो जमानो उल्टो आयो...

- सदाशिव 'कौतुक'


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