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16 मई, 2008


ब्लॉग्स (6)
कई होयगो इना देस कोपुलिस कचरो करे केस कोदफतर-दफतर बैठ्या दलाल,अफसरज खींचे है खाल,जुवान पढ़े रस्तो ले बिदेस को,कईं होयगा इना देस को,नेता कुरछी के है तोड़े,जम्या रेवे पद नी छोड़े,चलाय तमाशो करे केश कोकईं होयगा इना देस कोगाँधी नेहरू सुभाष भगत,अमर होया, करवई ... आगे पढ़ें...

म्हारा सहर की बिजली, वा जो, सड़क ना पे लगी रे नी वासूर्य देवता का परकास से जले है, ने जदे सूर्यास्त हुई जावेतो वे भी बिचारी ना बुझी जावे। - नवीन बी. जोशी आगे पढ़ें...

जिनगी का थपेड़ा मऽ हम तो भण्डई गया,सोच्यो कईं थो नऽ, हाल कईं हुई गया।खिल्यो-खिल्यो रूप थो, नऽ कसी थी जुवानी,आवं तो गुठली सी ज्यादा हम चुसई गया।दुःख-दरद मिलज सदा नऽ होवऽ नाक मऽ दम,घर-गरस्थी की चक्की मऽ हम तो पिसई गया।भगवान को नाव लेणऽ देता नी लुगई-बच्चा,कसो ... आगे पढ़ें...