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उजाला को पेलाज टोटो हे


नवो टाटो मत छाबो।
जगे-जगे बुरई का जाला छवाना
ज्ञान का बुवारा से उने झाड़ी दो।
बायर-बायर मत चमकाव
थोड़ो अंदर बी झाँकी लो।
मनक-मनक से दूर हुई रियो
प्रेमभाव का जाला झटकी लो।
सगली इन्दरी सुदी चाले
इना वास्ते मन पे लगाम कसी लो।
मेनत करवा मे पाछे मत रो
गाँठ कसी के या बाँदी लो।
देसप्रेम धरम से मोटो हे
या बात जानी लो।
अच्छा करम से यो जनम पायो
अपना साथे जग के सुधारी लो।

- जगमोहन 'सजग'

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