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नी जाणे


भूक्यो नी जाणे सूक्यो-पाक्यो
तिस्यो नी जाणे छाण्यो-वाण्यो
उँघतो नी जाणे घूडो-बाडो
लालची नी जाणे अपणो-परायो
न्यायी नी जाणे थारो-म्हारो
कपूत नी जाणे रिस्तो-विस्तो
काळ नी जाणे छोट्यो-मोट्यो
परमात्मा नी जाणे रूप्यो-पयसो
जाग नी जाणे गिल्यो-सूक्यो
चोर नी जाणे इन्दार्‌यो-उजवाळ्‌यो
काटणेवाळा नी जाणे हर्‌यो-भर्‌यो
पयसो नी जाणे रस्तो-वस्तो
क्रोधी नी जाणे जगमो-पछमो
गुरु नी जाणे खाली-भर्‌यो
सिस्य नी जाणे अँगूठो-वँगूठो
माँ नी जाणे कपूत्यो-सपूत्यो
दारूड्यो नी जाणे खाळो-नाळो

- नंदकिशोर चौहान

प्रतिक्रियाएँ

Re: नी जाणे
यह कविता बहुत मार्मिक है औऱ इसलिए भी प्यारी लग रही है कि मालवी में है।
अस्वीकरण