एक कुटुम्ब का छे सभी, पण अनोखो भेद छे। यो फूल मन कऽ मोही लेज, वो कांटो सबकऽ छेदी देज। कमी होय तो सुखाड़ी दे, नी होय तो सबकऽ मारी दे। खूब होय तो डुबई देज, यो पाणी सबकऽ तारी देज। एक आकास का सब निवासी, अजब छटा छे तारानऽ की जो आग को गोलो सूरज छे तो ठंडई को घर ...
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