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19 जुलाई, 2008


ब्लॉग्स (8)
तू मस्ती म मत झूले रे गेल्या खुद के खुद मत भूले रे गेल्या बड़ा-बड़ा हुई गया ञ्याँ शैजादा बड़ा-बड़ा राजा राज करिग्या हीरा-मोरी जड्या ताज धरिग्या फिर तू हे रे किणा खेत की मूळी थोड़ो तो मन के छू ले रे गेल्या तू मस्ती म मत झूले रे गेल्या मनख है तो मनख बणि के रे ... आगे पढ़ें...

एक कुटुम्ब का छे सभी, पण अनोखो भेद छे। यो फूल मन कऽ मोही लेज, वो कांटो सबकऽ छेदी देज। कमी होय तो सुखाड़ी दे, नी होय तो सबकऽ मारी दे। खूब होय तो डुबई देज, यो पाणी सबकऽ तारी देज। एक आकास का सब निवासी, अजब छटा छे तारानऽ की जो आग को गोलो सूरज छे तो ठंडई को घर ... आगे पढ़ें...

पन्नी पन्नी थैलियों नऽ कचरा को अम्बार जगह जगह उबरईऽ रह्‌यो परदूषन पहार चरी चरी नऽ मरी रिया बेचारा ढोर ढंकार उजड़तो उजड़तो जईऽ रयो हर्‌यो भर्‌यो संसार सुआगत करअऽ मौत को यो सजतो तोरणद्वार पन्नी पन्नी थैलियाँ नऽ कचरा को अम्बार। लाल हरी काली धौली जगऽ जगऽ ह ... आगे पढ़ें...