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बागडऽज खेत खई री है


गरीबी हटाओ, गरीबी हटाओ, सभी खे साक्षर बनाओ का नारा आज देसभर में लगी रिया है,
ने उनका नाम पे लोग होन अनुदान पे अनुदान लई रिया है।

कुआ से खेततलक पानी आने में आदो पानी तो धरतीज रस्ता में जिरई (सोखी) लेवे, फसल अच्छी होय तो काँ से?
कुआ का एरे-मेरे (आसपास) हरियाली ने फसल देखी के ने हम मन खे समझई लेवाँ कि फसल अच्छी है।

पन कुआ से दूर बेठियो किरसान तो आज भी रोई रियो है ने कलपी के कई रियो है कि बागड़ खेत खई री है।
ने अपनो नाम लिखनो सीखी के कई रियो है कि हम साक्षर हुई गया है।

पन आज भी पोथी-पानड़ा ने सेठ-साहूकार का सामे तो हमारे कालो अक्षर भेंस बराबरज दीखे।
पैलाँ हम अँगूठो लगाता था, ने अबे सरकारी अफसर होय या सेट साहूकार, हमारे साक्षर समझी ने मन चाई जगा पे हमारो नाम लिखई ने लई जई रिया है।

पैला हम अनपढ़ गँवार था अबे साक्षर हुई ने लुटई रिया हाँ।
ने अनुदान पे अनुदान बागड़ पे चढ़ई रिया हाँ।

- पुष्पा दसौंधी 'सोमित्र'

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