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मांडो


नानी सी उमर में मांडो,

मत करो म्हारा दायजी,

बीरा म्हारा मायजी ने,

सगला मनक गामजी।

नानी सी...

उमर घणी ने काची-काची,

भणवा जउमाँ दायजी,

लोक-लाज बी राखूँ थारी,

मान बड़ऊमाँ दायजी।

नानी सी...

कांचा-पंचा हू बी खेलूँ,

लँगड़ी कुदूँ मायजी,

समझ नेठुई नी हे म्हारे,

मांडा ने घर-बार की।

नानी सी...

भेलम-भेल नाना-नानी,

काहे बिठाओ सांतजी,

माजनो तो घणो भलो है,

करम बुरा है दायजी।

नानी सी...

नानी हूँ, तमारी हूँ तो,

बेरी नी हूँ जान की,

बजन जानी ने मती उतारो,

सगलियाँ मनक तारणी।

नानी सी...

अरज म्हारी तम ने सुन लो,

पंचायत का साबजी,

घणा भणाया माड़साब ने,

अकल अबे लो कामजी।

नानी सी...

घणी लगावे रोक ने,

मांडो रोके बालजी।

हाथ उठई ने रोके जद कोई,

कतराओ तम जाय जी,

सरकारी सगलो जी अमलो,

काहे तम झुठलाओ जी।

नानी सी...

छिपी-छिपी ने करके मांडो,

पाछे फेर घबड़ावजी,

नाना-नाना न समझिया ने,

काहे बलि चड़ावजी।

नानी सी...

- रामप्रसाद 'सहज'

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