खाली-खाली गोद भरी दी,
जनम लई ने म्हने जी,
जी, तो म्हारी फूली समई गी,
गाल बको तम बाबूजी,
नानी जनम को नाम सुनी ने,
कँई करो ओ बाबूजी।
नाना-नाना पगलिया लई ने,
जी से तमार तक आऊँजी,
लाड़-दुलार तो करो नी, ने
चाँटो मारो बाबूजी,
म्हन्नो तमारो कँई बिगाड़ियो,
कँई करो ओ बाबूजी
नानी-मोटी पट्टी लई दो,
भणवाँ जऊँमा बाबूजी,
अच्छी-अच्छी फराक लई दो,
ढाँकी लूँ म्हारो डील जी,
नानी सी उमर में मांडो,
कँई करो ओ बाबूजी।
नानो होतो तो दुलारता,
माथे घणो बिठाता जी,
दो रोटा नी देतो तमारे,
जूता देतो ग्यारा जी,
सगली उमर हूँ नी भूलूँ तमारे,
तम हो म्हारा बाबूजी।
माथा उपरे हाथ रखी दो,
पाछे हटो मत बाबूजी।
- रामप्रसाद 'सहज'

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