पन्नी पन्नी थैलियों नऽ कचरा को अम्बार
जगह जगह उबरईऽ रह्यो परदूषन पहार
चरी चरी नऽ मरी रिया बेचारा ढोर ढंकार
उजड़तो उजड़तो जईऽ रयो हर्यो भर्यो संसार
सुआगत करअऽ मौत को यो सजतो तोरणद्वार
पन्नी पन्नी थैलियाँ नऽ कचरा को अम्बार।
लाल हरी काली धौली जगऽ जगऽ ह फैल्ली
बागड़ बा गड़ आ गढ़ बा गढ़ होती जई री थैली
उड़ती जाय पतंग सरीकी बनी बनी पौन सहेली
झूली री रे झाड़ झाड़ पे जसी झालर घोड़ी मेली
बिगड़ी घोड़ी, हुई भुताड़ी, घर तोड़ी, जावे नद्दी पार
पन्नी पन्नी थैलियाँ नऽ कचरा को अम्बार
आन बान से, बड़ी शान से, हर कोई लई ने चाले
नासपिटी घर घर दिख्खे नाचती राते उजाले
तम इखे जलाओ कदी तो या तमखेऽज बाळे
रावण की बैणा ह या करे कु लच्छन चाळे
नागण को सिंगार हया विसकन्या को अवतार
पन्नी पन्नी थैलियाँ नऽ कचरा को अम्बार
हातो-हात चालिरियो चूप्पी साधी यो हतियार
कोई नी जाणे आतंकवाद सी कैसी होवे इकी मार
अरे! बिसधर तो मूसक अरु कीड़ा करे शिकार
पण या तो खेत खेत न बोई री जहर भरमार
कॉ उगेगो अन्ना जल जाँ पैदा हों भंगार?
पन्नी पन्नी थैलियाँ नऽ कचरा को अम्बार
अख्खी अख्खी धरती पे या अपणी परत जमावे
पाणी को पाणी रेणे नी देवे कोरो उके बहावे
कुआ बावड़ी नद्दी नाळा ताळ तलैया या गंदगी लावे
बारीस की बाढ़ बढ़ावे, गाँव गाँव निगली जावे
राहू केतू की जाई ह या जमदूत की मार
पन्नी पन्नी थैलियाँ नऽ कचरा को अम्बार
स्कूल कॉलेज होय के, होय पिकनीक मजेदार
हाट बाजार होय के, मन्दर मस्जिद गुरुद्वार
देसी छकड़ा होय के होय अँगरेजी कार
इका नजारा जगे जगे देखवा आवे हर बार
मसान भी खोदो गर तो पेला, इकी मिले मजार
पन्नी पन्नी थैलियाँ न, कचरा को अम्बार
सेहर सेहर तमे दिखेगा बिणता मासूम थैलियाँ
नेता गुण्डा न्हे चकाचक आड में हेरा फैरियाँ
देस बचपन बिमार हुई रियो, भरी री तिजोरियाँ
कतरा राज छुपई बैठी ई पारदर्सी अपार थैलियाँ
कई काँवा अनाथ बच्चीना का ले ई कपड़ा उतार
पन्नी पन्नी थैलियाँ नऽ कचरा को अम्बार
कई बतावा कच्ची कच्ची कली कली नोचे ले उतार
पन्नी, पन्नी थैलियाँ नऽ कचरा को अम्बार।
- ओ. जोशी 'बब्बू'

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