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22 जुलाई, 2008


ब्लॉग्स (2)
रस्तऽ चलतऽ वात हुई गईमोबाइल पऽ वात हुई गईसुणी संदेसो मन हरखायोमन किलोल-कुचमात हुई गईप्यार-मिलन को वायदो हुयोतय बी टेम संगात हुई गईमन को पंछी उड्यो फड़फड़ीजाणुं वाड़ी की वाट हुई गईसपना डोला न मऽ सजायाफेरा पड्या वरात चली गईडोली इदाई की उठी गईघर जाति जमात चली ... आगे पढ़ें...

डोरी बळई गई, पण ओको-वळ नी गयो।मसाण मऽ हाड़का गया- पणमाथा पर को सळ नी गयो।थारो-म्हारो, म्हारो-थारो करतऽ-सारी जिन्दगी गई- पणअवँऽ भी मन सी परपंच न-छळ नी गयो।दूसरा खऽ निर्मळो रहेणऽ कोपाठ पढ़ावजपण खुद का भितरऽ को-जरा सो भी, मळ नी गयो।लोग नऽ खऽ बतावज- निन्दा ... आगे पढ़ें...