डोरी बळई गई, पण ओको-वळ नी गयो।मसाण मऽ हाड़का गया- पणमाथा पर को सळ नी गयो।थारो-म्हारो, म्हारो-थारो करतऽ-सारी जिन्दगी गई- पणअवँऽ भी मन सी परपंच न-छळ नी गयो।दूसरा खऽ निर्मळो रहेणऽ कोपाठ पढ़ावजपण खुद का भितरऽ को-जरा सो भी, मळ नी गयो।लोग नऽ खऽ बतावज- निन्दा ...
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