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वळ नी गयो


डोरी बळई गई, पण ओको-
वळ नी गयो।
मसाण मऽ हाड़का गया- पण
माथा पर को सळ नी गयो।
थारो-म्हारो, म्हारो-थारो करतऽ-
सारी जिन्दगी गई- पण
अवँऽ भी मन सी परपंच न-
छळ नी गयो।
दूसरा खऽ निर्मळो रहेणऽ को
पाठ पढ़ावज
पण खुद का भितरऽ को-
जरा सो भी, मळ नी गयो।
लोग नऽ खऽ बतावज- निन्दा करनू
पाप छे-
पण खुद को निन्दा करे बिना
एक पळ नी गयो
डोरी बळई गई, पण ओको-
वळ नी गयो।


- रे.शं. मांगरोले

अस्वीकरण