Webdunia: Portal - Search - Mail - Greetings   More >>
Support | Font Download | Feedback
Search  
Welcome, Guest  [ Register | Sign In ]

मोबाइल पऽ वात


रस्तऽ चलतऽ वात हुई गई
मोबाइल पऽ वात हुई गई

सुणी संदेसो मन हरखायो
मन किलोल-कुचमात हुई गई

प्यार-मिलन को वायदो हुयो
तय बी टेम संगात हुई गई

मन को पंछी उड्यो फड़फड़ी
जाणुं वाड़ी की वाट हुई गई

सपना डोला न मऽ सजाया
फेरा पड्या वरात चली गई

डोली इदाई की उठी गई
घर जाति जमात चली गई

- गजाननसिंह चौहान 'नम्र'

अस्वीकरण