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25 जुलाई, 2008


ब्लॉग्स (2)
घर में रेवेचार मनकदो नाना,दो मोटाभेरु सुद्दा।दाड़की करेभुसांदो हुई जायबीस को आटो,पाँच की सागतेल कोनीलून-मरचलाखी ने पेट कीआग बुझाय।बीड़ी-माचिसतमाक... आगे पढ़ें...

काळा-काळा बादळा,अई जा-अई जा बादळा।धरती करे हे पुकार,तू आवे क्यों नई रे।नद्दी नाळा सूकी ग्या,कुआ बी सूकी ग्या।बिन पाणी के तरसे लोग,तू बरसे क्यों नई रे।बाग बी सूकी र्‌या,जंगलना बी उजड़ी र्‌या।हर्‌यो-भर्‌यो नी हे चारी ओर,तू आवे क्यों नई रे।मोर बी तरसी ... आगे पढ़ें...