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अगस्त 2008


ब्लॉग्स (4)
प्रभु! हऊँ कईं करुँगाथारी शरणागति ली नऽम्हारा सगळा दुश्मन तो-पयलऽज शरणागत छे थारा- हृदयेश भारद्वाज आगे पढ़ें...

थारा हाल बता तू प्यारा।उनका तो छे वारा-न्यारा।तू बी खातो मीठी कयरी,कदी अम्बो लगावता अज्या* थारा।नींद खुली नऽ सपनो टूट्यो,हवा मँऽ उडन्या रइगा नारा।दूध पेवाड़ो नऽ पुन्ना कमावो,सबई नऽ खोल्या नाग पिटारा।सड़क किनारऽ बठण्यो जोतिस,बतइ रयोज ऊ भाग हमारा।जाफा उच्चो ... आगे पढ़ें...

पोती बोली-दादाजी अब तम रिटायर हुई ग्या हो,नवरा हो तो घर का काम में हाथ बटाव,दादाजी बोल्या-कईं करूँ?तो तपाक से दादी बोली-नवरा हो तो बासन जमई दो,नवरा हो तो छोरा के बस स्टेंड छोड़ी आव,नवरा हो तो, कुंडा में पानी डाली दो,नवरा हो तो, बटला छीली दोनवरा हो तो, गऊँ ... आगे पढ़ें...