एक ज्ञान की बात सुणाऊँ, जरा तुम सुणता जाजो रे,रस्तऽ चखतऽ मिलऽ सबई ख तुम कहेता जाजो रे,विद्या को तो मान घणो छे, विद्या धन महान छे,विद्या बिना तो मनुसन पशु, दुदई एक समान छे,चोर नी चोरऽ एखऽ, भाई नी पाड़ऽ एमऽ वाटो रे,जेतरी खरचो दूणी बढ़ऽ, पड़ऽ नी एमऽ घाटो ...
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