पोती बोली-
दादाजी अब तम रिटायर हुई ग्या हो,
'नवरा' हो तो घर का काम में हाथ बटाव,
दादाजी बोल्या-कईं करूँ?
तो तपाक से दादी बोली-
नवरा हो तो बासन जमई दो,
नवरा हो तो छोरा के बस स्टेंड छोड़ी आव,
नवरा हो तो, कुंडा में पानी डाली दो,
नवरा हो तो, बटला छीली दो
नवरा हो तो, गऊँ पिसाई लाव
नवरा हो तो, रद्दी बेची दो,
नवरा हो तो बिजली को बिल भरी आव
नवरा हो तो छोरी के घुमई लाव
बऊ का हाथ की गरम-गरम रोटी मिलेगी
नवरा हो तो म्हाराज के बुलाई लाव,
सतनारान की कथा बाँची देगा,
नवरा हो तो साग-भाजी लियाव,
नवरा हो तो चाय बनई लो
तम भी पियो ने म्हारे भी पिलाव
काम करोगा तो हाड़का चलेगा
नी तो यूँ का यूज रई जावगा
दादाजी समझी ग्या काम को महत्व
ने नवी जिंदगानी को आनंद उठाने लग्या।
- हरमोहन नेमा 'हरि'

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