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सबइ नऽ खोल्या नाग पिटारा


थारा हाल बता तू प्यारा।
उनका तो छे वारा-न्यारा।

तू बी खातो मीठी कयरी,
कदी अम्बो लगावता अज्या* थारा।

नींद खुली नऽ सपनो टूट्यो,
हवा मँऽ उडन्या रइगा नारा।

दूध पेवाड़ो नऽ पुन्ना कमावो,
सबई नऽ खोल्या नाग पिटारा।

सड़क किनारऽ बठण्यो जोतिस,
बतइ रयोज ऊ भाग हमारा।

जाफा उच्चो थिगणऽ को सोच्यो,
दिन मँऽ हमनऽ देख्या तारा।

जेतरी सक्कर नाखी 'अनुज',
रिस्ता ओतरा हुयाज खारा।
*अज्या=पुरखा

- कुँअर उदयसिंह 'अनुज'

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