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शरणागति


प्रभु! हऊँ कईं करुँगा
थारी शरणागति ली नऽ
म्हारा सगळा दुश्मन तो-
पयलऽज शरणागत छे थारा

- हृदयेश भारद्वाज

अस्वीकरण