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8 अप्रैल, 2009


ब्लॉग्स (9)
सावन रा सेरा शिरू, मण म्हारो हरसाय।म्हूँ भींगा बदन तरसूं, कद पिया घर आय॥उड़ता-उड़ता बादला, पलक झपकता आय।कईं सपटनी पड़े रे, कद बरसी ने जाय॥फुहाराँ घुस के म्हारा, पीछे-पीछे आय।हात पकड़ी के सगला, घर में नाच नचाय॥बूँदा टपकी के अबे, चूमे हे रे गाल।फैल्या सिन्दूर ... आगे पढ़ें...

नीम निंबोली पाकी जी- सावन मइनो आयोजी।उठो हो म्हारा बाला बीरा- लीलड़ी पलारोर जी।तमारी तो प्यारी बेन्या- सासरिया में झूलेगी।झूले तो झूलवा दीजो- अबके सावन आवांजी।कारे माली का छोरा- म्हारी बेन्या के देखी थी।देखी थी भई देखी थी- पाणी भरता देखी थी।हाथ में हरियालो ... आगे पढ़ें...

डोला बण्या अकास नऽ काजल बणी वादलो छायो।उड़ी बाल की लट नऽ असी आखो मुंडो ढकायो॥चमकी कपाल उप्पर टिकी जिको फैल्यो उजालो।दपडायो साड़ी का पल्ला न चाँद मुंडो मतवालो॥चोटी मऽ फबी उठ्यो रे फुंदो लटक्यो सोभा वालो।लगऽ नाक मऽ नथनी असी दियो तिजोरी तालो॥नवली को सिणगार ... आगे पढ़ें...