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एक थेली का चट्टा-बट्टा


प्रजातंत्र में बोल्वा को सभी खे हक ने अधिकार है। कोई भी अपनो दुखड़ो चिल्लई-चिल्लई के ने कई सके है।
नाथुलालजी का छोरा खे नौकरी नी मिली री है, बिचारो हात में डिग्री लई ने नौकरी वास्ते जगा-जगा फिरी रियो है। आज भ्रष्टाचार की शिकायत लई ने नाथुलालजी नेताजी का पास गया, उनने अपनो सगलो दुखड़ो नेताजी खे कियो कि कसे उनने छोरा खे भणायो ने अबे तो घर में फाका पड़ी रिया है।

नेताजी ने सगली बात पंचायत का माय सुनी ने अपना पीए खे बुलई के बोल्या- नाथुलालजी से उनका बेटा की दरखास लेने को कियो कि आप बाहर जाकर हमारे पी.ए. को सारे कागजात दे दीजिए व उनसे कार्रवाई के संबंध में समझ लीजिए।

पीए ने इसारा से नाथुलालजी खे अपना पीछे-पीछे आने को कियो ने सबकी आँख बचई के उनका कान का पास जई के कान में कई कियो ने खिसकता पेंट खे ऊपर चढ़ातो आगे चले गयो। और केतो गयो- आज शाम को मेरे घर पर आ जाना आपके बेटे को नौकरी मिल जायगी।

-पुष्पा दसौंधी 'सोमित्र'

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