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9 सितंबर, 2009


ब्लॉग्स (4)
- नरहरि पटेलतवा सा तमतमाता त्रास का दनतरस का तिलमिलाता प्यास का दनतवे से तमतमाते त्रास के दिनतरसते तिलमिलाते प्यास के दिनअलूणी साँझ रात खाटी हैनिठारा निरजला उपास का दनये फीकी साँझ -रात नफ़रत कीनिपट ये निरजले उपवास के दिनखाली हे कुवाँ-बावडी,खाली हे घटउखड़ती ... आगे पढ़ें...

फुल्डा बिन्न्ती तू चली ओ लड़क्ली अपना पिताजी का बाग म ,कछु बिनय कछु बिनवा हो लाग्या एत्रा म आया दुल्ल्व रायजी ,उठो लड़क्ली बठो पाल्क्डी चलो तो आपना देस जी जंव दादाजी वर प्र्ख्से तंव जाई जावा तुमरा साथ जी ,जंव हमरा पिताजी दायजो स्न्जोव तंव जाई जावा तुमरा ... आगे पढ़ें...

पॉँच बधावा पिया न हो गढ़ रे सुहाना हो , पॉँच बधावा जो आवत हम देख्या ........... की प्य्लो बधावो पिया न हो , ससरा घर भेजो हो ,दुसरो बधावो सहोदर बाप घर | की तिस्रो बधावो पिया न हो जेठ घर भेजो हो , चोथो बधावो सहोदर वीरा घर | की पांच्वो बधावो पिया न हो कूख ... आगे पढ़ें...