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फुल्डा बिन्न्ती तू चली


फुल्डा बिन्न्ती तू चली ओ लड़क्ली अपना पिताजी का बाग म ,
कछु बिनय कछु बिनवा हो लाग्या एत्रा म आया दुल्ल्व रायजी ,
उठो लड़क्ली बठो पाल्क्डी चलो तो आपना देस जी
जंव दादाजी वर प्र्ख्से तंव जाई जावा तुमरा साथ जी ,
जंव हमरा पिताजी दायजो स्न्जोव तंव जाई जावा तुमरा साथ जी ,
जंव हमरा जीजाजी मंडप छाव तंव जाई जावा तुमरा साथ जी ,
जंव हमरी माय जो कूख पुजाड तंव जाई जावा तुमरा साथ जी
काहे ख पालई रे बाबुल काहे ख पोसी काहे पिलायो काचो दूध जी ,
माया सी पालई रे बाबुलt माया सी पोसी,
ममता पिलायो काचो दूध जी

(कविता कोश से साभार)

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