प्रभु! हऊँ कईं करुँगाथारी शरणागति ली नऽम्हारा सगळा दुश्मन तो-पयलऽज शरणागत छे थारा- हृदयेश भारद्वाज आगे पढ़ें...
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थारा हाल बता तू प्यारा।उनका तो छे वारा-न्यारा।तू बी खातो मीठी कयरी,कदी अम्बो लगावता अज्या* थारा।नींद खुली नऽ सपनो टूट्यो,हवा मँऽ उडन्या रइगा नारा।दूध पेवाड़ो नऽ पुन्ना कमावो,सबई नऽ खोल्या नाग पिटारा।सड़क किनारऽ बठण्यो जोतिस,बतइ रयोज ऊ भाग हमारा।जाफा उच्चो ... आगे पढ़ें...
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पोती बोली-दादाजी अब तम रिटायर हुई ग्या हो,नवरा हो तो घर का काम में हाथ बटाव,दादाजी बोल्या-कईं करूँ?तो तपाक से दादी बोली-नवरा हो तो बासन जमई दो,नवरा हो तो छोरा के बस स्टेंड छोड़ी आव,नवरा हो तो, कुंडा में पानी डाली दो,नवरा हो तो, बटला छीली दोनवरा हो तो, गऊँ ... आगे पढ़ें...
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एक ज्ञान की बात सुणाऊँ, जरा तुम सुणता जाजो रे,रस्तऽ चखतऽ मिलऽ सबई ख तुम कहेता जाजो रे,विद्या को तो मान घणो छे, विद्या धन महान छे,विद्या बिना तो मनुसन पशु, दुदई एक समान छे,चोर नी चोरऽ एखऽ, भाई नी पाड़ऽ एमऽ वाटो रे,जेतरी खरचो दूणी बढ़ऽ, पड़ऽ नी एमऽ घाटो ... आगे पढ़ें...
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घर में रेवेचार मनकदो नाना,दो मोटाभेरु सुद्दा।दाड़की करेभुसांदो हुई जायबीस को आटो,पाँच की सागतेल कोनीलून-मरचलाखी ने पेट कीआग बुझाय।बीड़ी-माचिसतमाक... आगे पढ़ें...
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काळा-काळा बादळा,अई जा-अई जा बादळा।धरती करे हे पुकार,तू आवे क्यों नई रे।नद्दी नाळा सूकी ग्या,कुआ बी सूकी ग्या।बिन पाणी के तरसे लोग,तू बरसे क्यों नई रे।बाग बी सूकी र्या,जंगलना बी उजड़ी र्या।हर्यो-भर्यो नी हे चारी ओर,तू आवे क्यों नई रे।मोर बी तरसी ... आगे पढ़ें...
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रस्तऽ चलतऽ वात हुई गईमोबाइल पऽ वात हुई गईसुणी संदेसो मन हरखायोमन किलोल-कुचमात हुई गईप्यार-मिलन को वायदो हुयोतय बी टेम संगात हुई गईमन को पंछी उड्यो फड़फड़ीजाणुं वाड़ी की वाट हुई गईसपना डोला न मऽ सजायाफेरा पड्या वरात चली गईडोली इदाई की उठी गईघर जाति जमात चली ... आगे पढ़ें...
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डोरी बळई गई, पण ओको-वळ नी गयो।मसाण मऽ हाड़का गया- पणमाथा पर को सळ नी गयो।थारो-म्हारो, म्हारो-थारो करतऽ-सारी जिन्दगी गई- पणअवँऽ भी मन सी परपंच न-छळ नी गयो।दूसरा खऽ निर्मळो रहेणऽ कोपाठ पढ़ावजपण खुद का भितरऽ को-जरा सो भी, मळ नी गयो।लोग नऽ खऽ बतावज- निन्दा ... आगे पढ़ें...
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तू मस्ती म मत झूले रे गेल्या खुद के खुद मत भूले रे गेल्या बड़ा-बड़ा हुई गया ञ्याँ शैजादा बड़ा-बड़ा राजा राज करिग्या हीरा-मोरी जड्या ताज धरिग्या फिर तू हे रे किणा खेत की मूळी थोड़ो तो मन के छू ले रे गेल्या तू मस्ती म मत झूले रे गेल्या मनख है तो मनख बणि के रे ... आगे पढ़ें...
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एक कुटुम्ब का छे सभी, पण अनोखो भेद छे। यो फूल मन कऽ मोही लेज, वो कांटो सबकऽ छेदी देज। कमी होय तो सुखाड़ी दे, नी होय तो सबकऽ मारी दे। खूब होय तो डुबई देज, यो पाणी सबकऽ तारी देज। एक आकास का सब निवासी, अजब छटा छे तारानऽ की जो आग को गोलो सूरज छे तो ठंडई को घर ... आगे पढ़ें...
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पन्नी पन्नी थैलियों नऽ कचरा को अम्बार जगह जगह उबरईऽ रह्यो परदूषन पहार चरी चरी नऽ मरी रिया बेचारा ढोर ढंकार उजड़तो उजड़तो जईऽ रयो हर्यो भर्यो संसार सुआगत करअऽ मौत को यो सजतो तोरणद्वार पन्नी पन्नी थैलियाँ नऽ कचरा को अम्बार। लाल हरी काली धौली जगऽ जगऽ ह ... आगे पढ़ें...
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खाली-खाली गोद भरी दी, जनम लई ने म्हने जी, जी, तो म्हारी फूली समई गी, गाल बको तम बाबूजी, नानी जनम को नाम सुनी ने, कँई करो ओ बाबूजी। नाना-नाना पगलिया लई ने, जी से तमार तक आऊँजी, लाड़-दुलार तो करो नी, ने चाँटो मारो बाबूजी, म्हन्नो तमारो कँई बिगाड़ियो, कँई करो ... आगे पढ़ें...
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जेठ मइना धरती असी तपऽ धाणी सेकी लऽ॥ पंस्यो ववज माथा सी पाँय तक झरऽ झिराला॥ बाप रे बाप हवा दपड़ी गई घाम देखी नऽ॥ पड्या दराड़ा घाम का आतंक सी रड़ नी फूटऽ॥ सन्नााटो छायो आतंकी घामला सी करफ्यू जसो॥ सुकई गया नद्दी-नाला-तलाव सुर्या को कोप॥ पाणी का लेणऽ तरसी रया ... आगे पढ़ें...
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नानी सी उमर में मांडो, मत करो म्हारा दायजी, बीरा म्हारा मायजी ने, सगला मनक गामजी। नानी सी... उमर घणी ने काची-काची, भणवा जउमाँ दायजी, लोक-लाज बी राखूँ थारी, मान बड़ऊमाँ दायजी। नानी सी... कांचा-पंचा हू बी खेलूँ, लँगड़ी कुदूँ मायजी, समझ नेठुई नी हे म्हारे, ... आगे पढ़ें...
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गरीबी हटाओ, गरीबी हटाओ, सभी खे साक्षर बनाओ का नारा आज देसभर में लगी रिया है, ने उनका नाम पे लोग होन अनुदान पे अनुदान लई रिया है। कुआ से खेततलक पानी आने में आदो पानी तो धरतीज रस्ता में जिरई (सोखी) लेवे, फसल अच्छी होय तो काँ से? कुआ का एरे-मेरे (आसपास) ... आगे पढ़ें...
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