जिके डुबकी लगाता नीं आवे,ऊ मोती लाणों कईं जाणेजिने देखी नीं टूटी नाव कदी , ऊ पार लगाणों कईं जाणेहे बायर(बाहर)ऊजळो बगळा सो, भीतर काजळ सरको काळोकूदी कूदी ने भाषण दे, घर में पिये दारू को प्यालोजिके अपणों नी हे खुद काँ,ऊ बाट(राह) बताणों कईं जाणेकुर्सी का मद ... आगे पढ़ें...
|
रई रई के म्हारे हिचक्याँ अ इरी हेलजवन्ती तू ने याद कर्यो होगाथारे बिन मोसम निरबंसी लागेतू हो तो सूरज उगनो त्यागेम्हारी आँख्यां भी राती वईरी हेतू ने उनमें परभात भरयो होगासुन लोकगीत का पनघट की राणीथारे बिन सूके (सूखना) पनघट को पाणीफिर हवा,नीर यो काँ से लईरी ... आगे पढ़ें...
|
बीत्यो जूनो साल अब हुवो नवा बरस को आगमन। गया बरसे की कराँ विदाई, और नवा को अभिनंदन॥ गया बरस... किने हँसायो किने रुलायो, आगे जरा हिसाब कराँ। उजड़्या हुआ चमन में कोई खिलतो तको गुलाब धराँ। आओ मिलने खुशियाँ रोपाँ, और लगावाँ मधुबन। गयो बरस... दीन-दुःखी से ... आगे पढ़ें...
|
नवा नवा छोरा नऽ की, नवी नवी बात चार किताब ऽ काई भणी गयो घणोजऽचेन्दराजऽ। खाटलाप ऽ बठी न ऽ रोटा मचकाबज नखराली बैरो सरको नखरा बतावजऽ अवन्दो सवन्दो बोली नऽ खुबज ऽ उतमाजऽ। काई मालुम कन्यागसी कई आयोफटफटी बैरोखऽबठाडी न ऽ लईजजऽखरगुण को बजार नान्हा नान्हा लेकरु ... आगे पढ़ें...
|
नाम अमरसिंग रखवा से कोई अमर नी होए, मनख जिंदगी में आज मरिया ने कल दो दिन होए। आँख पे पट्टी बाँधवा से जमानो अंधों नी होए। एक बनिया का नी आवा से, हाठ मंदों नी होए। जादू बोले माथे चढ़के, पाप बोले मगरा चढ़के, इश्क और मुश्क की आग बुझावा से और भड़के देखादेखी करवा ... आगे पढ़ें...
|
सब में उको नूर समायो सब में उको नूर समायो, थार में बी ने म्हार में बी, उकी रेमत को सायो, थार पे बी, ने म्हार पे बी, बादल्या बरसा किरपा उखी, मिलि रियो, दानो-पानी बी, वणीए यो एसास करायो, थारे बी ने म्हारे बी। वाट भलई अलग-अलग है, पण खून को रंग एक है, वणीए ... आगे पढ़ें...
|
अपणी ढपली नऽ अपणी राग अलापज लोग, आधा गाँव मऽ होली नऽ आधा मऽ दिवाली मनावज लोग। जनता की भलई की वो वात नऽ बड़ी-बड़ी करज, माथ अई जावऽ तो मुंडो छिपावज लोग। सच्चई देखी भी ल्यो तो मत बोलजो तम काकाजी, फंदा मऽ वो उनका गरीब का फसावज लोग। चुनाव का टेम आवज नेता बरसाती ... आगे पढ़ें...
|
Malvi is the language of the Malwa region of India, with more than a million speakers. The language is also sometimes known as Malavi, Ujjaini, etc. Malvi is classified with the Rajasthani languages, with Nimadi, spoken in the Nimar region of Madhya ... आगे पढ़ें...
|
मंदसौर। मंदसौर पीजी कालेज में मालव माटी की महक ने माहौल में अनूठी रंगत भर दी है। यहां पहली बार लोक साहित्य पढ़ाया जा रहा है। इसमें जाने-माने मालवी साहित्यकारों की रचनाएं नई पीढ़ी की जबान पर आ रही हैं। रामाजी रईग्या ने रेल जाती री... और चटक म्हारा चंपा.. ... आगे पढ़ें...
|
बरवत इतरो बुरो तो नी है...अब बी तितल्याँ उड़े हैंनाना-नानी इसकूल जाइ र्या हैबद्दल बरसे हैऔर नद्दी भी ऊँडी कम है पन बेती जइरी हैअपणे बस थोड़ो और करनो हैजाणों है वणां मनखाँ की बस्ती मेंजिणको जीवन अबे बी बदहाल हैविकास नी पोंच्यो है आखरी आदमी तकभेदभाव अब बी है ... आगे पढ़ें...
|
अपणो घर मत फोड़ो रे, मत माय-बाप खऽ छोड़ो रे सरम जरा सी राखो तम, मत बेसरमी चादर ओढ़ो रे। अपणो घर मत फोड़ो रे॥ माय-बाप छे जान सी प्यारा, हम उनकी छे आँख का तारा। दिल उनको मत तोड़ो रे, अपणो घर मत फोड़ो रे। कसा उननऽ हमखऽ उछार्या, ई वात नऽ खऽ कदी मन मँऽ विचार्या? ... आगे पढ़ें...
|
जिनगी को एक पळ नी ठिकाणो, जायगऽ अंधों, बयर्यो नऽ काणो। हाथ-पांय जेखऽ दिया सलामत, मरनूं ओखो बी पक्को जाणो। बईमानी खऽ नातरऽ बठाड़ी नऽ, ईमानदारी को लई आओ आणो। दुख को घाम कदी नी चोटऽगऽ, सद्गुण कापड़ा को तंबू ताणों। सरी खऽ अच्छो राखणूं होयतो, पयलऽ पेणऽ का पाणी ... आगे पढ़ें...
|
म्हारा आँगणा म आ रे कागा पियर को हला सुणा रे कागा चाँदी की थणे चोच घड़व्वा ने हीरा हुण की थणे आँख्या पीतल का थणे घड़व्वा ने सुन्नाा की थणे पाँख्या म्हारा आँगणाम आ रे कागा पियर का हाल सुणा रे कागा मूँगा की थणे खीर खड़व्वा ने मोती हुण का थणे-मेवा माखन ने ... आगे पढ़ें...
|
हाथ में गेती ने माथा पे तगारी बाल मजूर। अबे कां करें मनक, मनक की दुःख की बात। रूप्या-पइसा भरो-पूरो परबार निराश्रत वी। बालक मांजे होटल में ठामड़ा बूढ़ा भणे हे। पेट काटीणे औलाद के भणई वो रोट नी दे। अन्ना उगाय सींचीणे परसीणो भूख ती मरे। -अशोक आनन (नईदुनिया) आगे पढ़ें...
|
मन के भावैलाडू पेड़ा बरफीवी बीमार छेकतरो जपाँनीजर नी आवैकाँ! भगवानझट सी रूठीघर की रामप्यारीकसौ मनावागाँव को छेगँवार नी कहलावैअँगरेजी बोलेझाड़ काटीणेउपदेश लुटावैवृक्षप्रेमी छे।-प्रदीप शर्मा (नईदुनिया) आगे पढ़ें...
|