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चैनल: मालवी-निमाड़ी गीत व लोकगीत


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ब्लॉग्स (23)
फुल्डा बिन्न्ती तू चली ओ लड़क्ली अपना पिताजी का बाग म ,कछु बिनय कछु बिनवा हो लाग्या एत्रा म आया दुल्ल्व रायजी ,उठो लड़क्ली बठो पाल्क्डी चलो तो आपना देस जी जंव दादाजी वर प्र्ख्से तंव जाई जावा तुमरा साथ जी ,जंव हमरा पिताजी दायजो स्न्जोव तंव जाई जावा तुमरा ... आगे पढ़ें...

पॉँच बधावा पिया न हो गढ़ रे सुहाना हो , पॉँच बधावा जो आवत हम देख्या ........... की प्य्लो बधावो पिया न हो , ससरा घर भेजो हो ,दुसरो बधावो सहोदर बाप घर | की तिस्रो बधावो पिया न हो जेठ घर भेजो हो , चोथो बधावो सहोदर वीरा घर | की पांच्वो बधावो पिया न हो कूख ... आगे पढ़ें...

गढ़ हो गुंडी उप्पर नौबत वाजनौब्त वाज इंदर गढ़ गाजटो झीनी झीनी झांझर वाज हो गजानन |१ जंव हो गजानन जोसी घर जाजो ,तों अच्छा अच्छा लगीं निकालो हो गजानन |गढ़ हो .....२ जंव हो गजानन बजाजी घर जाजो ,तों अच्छा अच्छा कपडा ईसावो हो गजानन |३ जंव हो गजानन सोनी घर जाजो ... आगे पढ़ें...

नीम निंबोली पाकी जी- सावन मइनो आयोजी।उठो हो म्हारा बाला बीरा- लीलड़ी पलारोर जी।तमारी तो प्यारी बेन्या- सासरिया में झूलेगी।झूले तो झूलवा दीजो- अबके सावन आवांजी।कारे माली का छोरा- म्हारी बेन्या के देखी थी।देखी थी भई देखी थी- पाणी भरता देखी थी।हाथ में हरियालो ... आगे पढ़ें...

डोला बण्या अकास नऽ काजल बणी वादलो छायो।उड़ी बाल की लट नऽ असी आखो मुंडो ढकायो॥चमकी कपाल उप्पर टिकी जिको फैल्यो उजालो।दपडायो साड़ी का पल्ला न चाँद मुंडो मतवालो॥चोटी मऽ फबी उठ्यो रे फुंदो लटक्यो सोभा वालो।लगऽ नाक मऽ नथनी असी दियो तिजोरी तालो॥नवली को सिणगार ... आगे पढ़ें...

काळी वादळई खऽ भूरो वद्दळ पल्लो बाँधी लायो रेसरावण आयो रे- सरावण आयो रे- सरावण आयो रेकाळी वादळई छे नखराळीछम्म-छमाछम-छमक... आगे पढ़ें...

रस्तऽ चलतऽ वात हुई गईमोबाइल पऽ वात हुई गईसुणी संदेसो मन हरखायोमन किलोल-कुचमात हुई गईप्यार-मिलन को वायदो हुयोतय बी टेम संगात हुई गईमन को पंछी उड्यो फड़फड़ीजाणुं वाड़ी की वाट हुई गईसपना डोला न मऽ सजायाफेरा पड्या वरात चली गईडोली इदाई की उठी गईघर जाति जमात चली ... आगे पढ़ें...

एक ज्ञान की बात सुणाऊँ, जरा तुम सुणता जाजो रे,रस्तऽ चखतऽ मिलऽ सबई ख तुम कहेता जाजो रे,विद्या को तो मान घणो छे, विद्या धन महान छे,विद्या बिना तो मनुसन पशु, दुदई एक समान छे,चोर नी चोरऽ एखऽ, भाई नी पाड़ऽ एमऽ वाटो रे,जेतरी खरचो दूणी बढ़ऽ, पड़ऽ नी एमऽ घाटो ... आगे पढ़ें...

रस्तऽ चलतऽ वात हुई गईमोबाइल पऽ वात हुई गईसुणी संदेसो मन हरखायोमन किलोल-कुचमात हुई गईप्यार-मिलन को वायदो हुयोतय बी टेम संगात हुई गईमन को पंछी उड्यो फड़फड़ीजाणुं वाड़ी की वाट हुई गईसपना डोला न मऽ सजायाफेरा पड्या वरात चली गईडोली इदाई की उठी गईघर जाति जमात चली ... आगे पढ़ें...

पन्नी पन्नी थैलियों नऽ कचरा को अम्बार जगह जगह उबरईऽ रह्‌यो परदूषन पहार चरी चरी नऽ मरी रिया बेचारा ढोर ढंकार उजड़तो उजड़तो जईऽ रयो हर्‌यो भर्‌यो संसार सुआगत करअऽ मौत को यो सजतो तोरणद्वार पन्नी पन्नी थैलियाँ नऽ कचरा को अम्बार। लाल हरी काली धौली जगऽ जगऽ ह ... आगे पढ़ें...

खाली-खाली गोद भरी दी, जनम लई ने म्हने जी, जी, तो म्हारी फूली समई गी, गाल बको तम बाबूजी, नानी जनम को नाम सुनी ने, कँई करो ओ बाबूजी। नाना-नाना पगलिया लई ने, जी से तमार तक आऊँजी, लाड़-दुलार तो करो नी, ने चाँटो मारो बाबूजी, म्हन्नो तमारो कँई बिगाड़ियो, कँई करो ... आगे पढ़ें...

नानी सी उमर में मांडो, मत करो म्हारा दायजी, बीरा म्हारा मायजी ने, सगला मनक गामजी। नानी सी... उमर घणी ने काची-काची, भणवा जउमाँ दायजी, लोक-लाज बी राखूँ थारी, मान बड़ऊमाँ दायजी। नानी सी... कांचा-पंचा हू बी खेलूँ, लँगड़ी कुदूँ मायजी, समझ नेठुई नी हे म्हारे, ... आगे पढ़ें...

आवो आवो माय गणगौर, धन भाग हमारा। खुल्या खुल्या सबई दरबार, खुल्या घर बार सारा॥ कंकू लगावां, चौखा चढ़ावां, कापड़ो नारियल बधावाँ, कराँ अरज घणी थारी, माय तू खऽ पाटऽ बठाड़ाँ, ननदी जावाँ, ढोल बजावाँ कराँ घणा सिंगार तुम्हारा। अईज बईण पीयर मऽ, द्वार-द्वार खोब ... आगे पढ़ें...

लावाँ-लावाँ रे गणगौर म्हारा घर रणुबाई खऽ लावाँ॥ म्हारा घर... लीपाँ-छाबाँ घर अंगणा खऽ सोरा सैरी गली अंगणा खऽ लावाँ रणुबाई वाट हार॥ म्हारा घर... ढोली बाबा ढोल बजा रे मंग्या दाजी ढोल बजा रे सब बोलो जै जैकार॥ म्हारा घर... जल-नरबदा-सी पाँय पखाराँ पेली चूँदड़ी ... आगे पढ़ें...

सेळई दऽ मत न्हाटड,कुतरा जसो मत काटऽ।सपड़ा ईमान को मही नऽ घाट,हांडी दूसरा की मत चाटऽ।दूसरा नऽख उल्लू समजी नऽ,तू खोबऽ कानून मत छाटऽ।करी नऽ गलती धांय-धांय तू,दूसरा नऽ खऽ मत डाटऽ।रावण की सोना की लंका नी रई,तू घमंड मंऽ मत फाटऽ।वैतरणी नीरबदा खऽ फोड़ी नऽ महेशकपट ... आगे पढ़ें...

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