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चैनल: मालवी दोहे


ब्लॉग्स (2)
सावन रा सेरा शिरू, मण म्हारो हरसाय।म्हूँ भींगा बदन तरसूं, कद पिया घर आय॥उड़ता-उड़ता बादला, पलक झपकता आय।कईं सपटनी पड़े रे, कद बरसी ने जाय॥फुहाराँ घुस के म्हारा, पीछे-पीछे आय।हात पकड़ी के सगला, घर में नाच नचाय॥बूँदा टपकी के अबे, चूमे हे रे गाल।फैल्या सिन्दूर ... आगे पढ़ें...

नाम अमरसिंग रखवा से कोई अमर नी होए, मनख जिंदगी में आज मरिया ने कल दो दिन होए। आँख पे पट्टी बाँधवा से जमानो अंधों नी होए। एक बनिया का नी आवा से, हाठ मंदों नी होए। जादू बोले माथे चढ़के, पाप बोले मगरा चढ़के, इश्क और मुश्क की आग बुझावा से और भड़के देखादेखी करवा ... आगे पढ़ें...