जिनगी का थपेड़ा मऽ हम तो भण्डई गया,सोच्यो कईं थो नऽ, हाल कईं हुई गया।खिल्यो-खिल्यो रूप थो, नऽ कसी थी जुवानी,आवं तो गुठली सी ज्यादा हम चुसई गया।दुःख-दरद मिलज सदा नऽ होवऽ नाक मऽ दम,घर-गरस्थी की चक्की मऽ हम तो पिसई गया।भगवान को नाव लेणऽ देता नी लुगई-बच्चा,कसो ...
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