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चैनल: कविताएँ


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ब्लॉग्स (38)
डोरी बळई गई, पण ओको-वळ नी गयो।मसाण मऽ हाड़का गया- पणमाथा पर को सळ नी गयो।थारो-म्हारो, म्हारो-थारो करतऽ-सारी जिन्दगी गई- पणअवँऽ भी मन सी परपंच न-छळ नी गयो।दूसरा खऽ निर्मळो रहेणऽ कोपाठ पढ़ावजपण खुद का भितरऽ को-जरा सो भी, मळ नी गयो।लोग नऽ खऽ बतावज- निन्दा ... आगे पढ़ें...

पोती बोली-दादाजी अब तम रिटायर हुई ग्या हो,नवरा हो तो घर का काम में हाथ बटाव,दादाजी बोल्या-कईं करूँ?तो तपाक से दादी बोली-नवरा हो तो बासन जमई दो,नवरा हो तो छोरा के बस स्टेंड छोड़ी आव,नवरा हो तो, कुंडा में पानी डाली दो,नवरा हो तो, बटला छीली दोनवरा हो तो, गऊँ ... आगे पढ़ें...

प्रजातंत्र में बोल्वा को सभी खे हक ने अधिकार है। कोई भी अपनो दुखड़ो चिल्लई-चिल्लई के ने कई सके है।नाथुलालजी का छोरा खे नौकरी नी मिली री है, बिचारो हात में डिग्री लई ने नौकरी वास्ते जगा-जगा फिरी रियो है। आज भ्रष्टाचार की शिकायत लई ने नाथुलालजी नेताजी का पास ... आगे पढ़ें...

पन्नी पन्नी थैलियों नऽ कचरा को अम्बारजगह जगह उबरईऽ रह्‌यो परदूषन पहारचरी चरी नऽ मरी रिया बेचारा ढोर ढंकारउजड़तो उजड़तो जईऽ रयो हर्‌यो भर्‌यो संसारसुआगत करअऽ मौत को यो सजतो तोरणद्वारपन्नी पन्नी थैलियाँ नऽ कचरा को अम्बार।लाल हरी काली धौली जगऽ जगऽ ह फैल्लीबागड़ ... आगे पढ़ें...

थारा हाल बता तू प्यारा।उनका तो छे वारा-न्यारा।तू बी खातो मीठी कयरी,कदी अम्बो लगावता अज्या* थारा।नींद खुली नऽ सपनो टूट्यो,हवा मँऽ उडन्या रइगा नारा।दूध पेवाड़ो नऽ पुन्ना कमावो,सबई नऽ खोल्या नाग पिटारा।सड़क किनारऽ बठण्यो जोतिस,बतइ रयोज ऊ भाग हमारा।जाफा उच्चो ... आगे पढ़ें...

पोती बोली-दादाजी अब तम रिटायर हुई ग्या हो,नवरा हो तो घर का काम में हाथ बटाव,दादाजी बोल्या-कईं करूँ?तो तपाक से दादी बोली-नवरा हो तो बासन जमई दो,नवरा हो तो छोरा के बस स्टेंड छोड़ी आव,नवरा हो तो, कुंडा में पानी डाली दो,नवरा हो तो, बटला छीली दोनवरा हो तो, गऊँ ... आगे पढ़ें...

काळा-काळा बादळा,अई जा-अई जा बादळा।धरती करे हे पुकार,तू आवे क्यों नई रे।नद्दी नाळा सूकी ग्या,कुआ बी सूकी ग्या।बिन पाणी के तरसे लोग,तू बरसे क्यों नई रे।बाग बी सूकी र्‌या,जंगलना बी उजड़ी र्‌या।हर्‌यो-भर्‌यो नी हे चारी ओर,तू आवे क्यों नई रे।मोर बी तरसी ... आगे पढ़ें...

डोरी बळई गई, पण ओको-वळ नी गयो।मसाण मऽ हाड़का गया- पणमाथा पर को सळ नी गयो।थारो-म्हारो, म्हारो-थारो करतऽ-सारी जिन्दगी गई- पणअवँऽ भी मन सी परपंच न-छळ नी गयो।दूसरा खऽ निर्मळो रहेणऽ कोपाठ पढ़ावजपण खुद का भितरऽ को-जरा सो भी, मळ नी गयो।लोग नऽ खऽ बतावज- निन्दा ... आगे पढ़ें...

तू मस्ती म मत झूले रे गेल्या खुद के खुद मत भूले रे गेल्या बड़ा-बड़ा हुई गया ञ्याँ शैजादा बड़ा-बड़ा राजा राज करिग्या हीरा-मोरी जड्या ताज धरिग्या फिर तू हे रे किणा खेत की मूळी थोड़ो तो मन के छू ले रे गेल्या तू मस्ती म मत झूले रे गेल्या मनख है तो मनख बणि के रे ... आगे पढ़ें...

एक कुटुम्ब का छे सभी, पण अनोखो भेद छे। यो फूल मन कऽ मोही लेज, वो कांटो सबकऽ छेदी देज। कमी होय तो सुखाड़ी दे, नी होय तो सबकऽ मारी दे। खूब होय तो डुबई देज, यो पाणी सबकऽ तारी देज। एक आकास का सब निवासी, अजब छटा छे तारानऽ की जो आग को गोलो सूरज छे तो ठंडई को घर ... आगे पढ़ें...

गरीबी हटाओ, गरीबी हटाओ, सभी खे साक्षर बनाओ का नारा आज देसभर में लगी रिया है, ने उनका नाम पे लोग होन अनुदान पे अनुदान लई रिया है। कुआ से खेततलक पानी आने में आदो पानी तो धरतीज रस्ता में जिरई (सोखी) लेवे, फसल अच्छी होय तो काँ से? कुआ का एरे-मेरे (आसपास) ... आगे पढ़ें...

एक ज्ञान की बात सुणाऊँ, जरा तुम सुणता जाजो रे, रस्तऽ चखतऽ मिलऽ सबई ख तुम कहेता जाजो रे, विद्या को तो मान घणो छे, विद्या धन महान छे, विद्या बिना तो मनुसन पशु, दुदई एक समान छे, चोर नी चोरऽ एखऽ, भाई नी पाड़ऽ एमऽ वाटो रे, जेतरी खरचो दूणी बढ़ऽ, पड़ऽ नी एमऽ घाटो ... आगे पढ़ें...

कई होयगो इना देस कोपुलिस कचरो करे केस कोदफतर-दफतर बैठ्या दलाल,अफसरज खींचे है खाल,जुवान पढ़े रस्तो ले बिदेस को,कईं होयगा इना देस को,नेता कुरछी के है तोड़े,जम्या रेवे पद नी छोड़े,चलाय तमाशो करे केश कोकईं होयगा इना देस कोगाँधी नेहरू सुभाष भगत,अमर होया, करवई ... आगे पढ़ें...

भूक्यो नी जाणे सूक्यो-पाक्योतिस्यो नी जाणे छाण्यो-वाण्योउँघतो नी जाणे घूडो-बाडोलालची नी जाणे अपणो-परायोन्यायी नी जाणे थारो-म्हारोकपूत नी जाणे रिस्तो-विस्तोकाळ नी जाणे छोट्यो-मोट्योपरमात्म... आगे पढ़ें...

नवो टाटो मत छाबो।जगे-जगे बुरई का जाला छवानाज्ञान का बुवारा से उने झाड़ी दो।बायर-बायर मत चमकावथोड़ो अंदर बी झाँकी लो।मनक-मनक से दूर हुई रियोप्रेमभाव का जाला झटकी लो।सगली इन्दरी सुदी चालेइना वास्ते मन पे लगाम कसी लो।मेनत करवा मे पाछे मत रोगाँठ कसी के या बाँदी ... आगे पढ़ें...

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