थारा हाल बता तू प्यारा।उनका तो छे वारा-न्यारा।तू बी खातो मीठी कयरी,कदी अम्बो लगावता अज्या* थारा।नींद खुली नऽ सपनो टूट्यो,हवा मँऽ उडन्या रइगा नारा।दूध पेवाड़ो नऽ पुन्ना कमावो,सबई नऽ खोल्या नाग पिटारा।सड़क किनारऽ बठण्यो जोतिस,बतइ रयोज ऊ भाग हमारा।जाफा उच्चो ... आगे पढ़ें...
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पोती बोली-दादाजी अब तम रिटायर हुई ग्या हो,नवरा हो तो घर का काम में हाथ बटाव,दादाजी बोल्या-कईं करूँ?तो तपाक से दादी बोली-नवरा हो तो बासन जमई दो,नवरा हो तो छोरा के बस स्टेंड छोड़ी आव,नवरा हो तो, कुंडा में पानी डाली दो,नवरा हो तो, बटला छीली दोनवरा हो तो, गऊँ ... आगे पढ़ें...
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काळा-काळा बादळा,अई जा-अई जा बादळा।धरती करे हे पुकार,तू आवे क्यों नई रे।नद्दी नाळा सूकी ग्या,कुआ बी सूकी ग्या।बिन पाणी के तरसे लोग,तू बरसे क्यों नई रे।बाग बी सूकी र्या,जंगलना बी उजड़ी र्या।हर्यो-भर्यो नी हे चारी ओर,तू आवे क्यों नई रे।मोर बी तरसी ... आगे पढ़ें...
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डोरी बळई गई, पण ओको-वळ नी गयो।मसाण मऽ हाड़का गया- पणमाथा पर को सळ नी गयो।थारो-म्हारो, म्हारो-थारो करतऽ-सारी जिन्दगी गई- पणअवँऽ भी मन सी परपंच न-छळ नी गयो।दूसरा खऽ निर्मळो रहेणऽ कोपाठ पढ़ावजपण खुद का भितरऽ को-जरा सो भी, मळ नी गयो।लोग नऽ खऽ बतावज- निन्दा ... आगे पढ़ें...
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तू मस्ती म मत झूले रे गेल्या खुद के खुद मत भूले रे गेल्या बड़ा-बड़ा हुई गया ञ्याँ शैजादा बड़ा-बड़ा राजा राज करिग्या हीरा-मोरी जड्या ताज धरिग्या फिर तू हे रे किणा खेत की मूळी थोड़ो तो मन के छू ले रे गेल्या तू मस्ती म मत झूले रे गेल्या मनख है तो मनख बणि के रे ... आगे पढ़ें...
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एक कुटुम्ब का छे सभी, पण अनोखो भेद छे। यो फूल मन कऽ मोही लेज, वो कांटो सबकऽ छेदी देज। कमी होय तो सुखाड़ी दे, नी होय तो सबकऽ मारी दे। खूब होय तो डुबई देज, यो पाणी सबकऽ तारी देज। एक आकास का सब निवासी, अजब छटा छे तारानऽ की जो आग को गोलो सूरज छे तो ठंडई को घर ... आगे पढ़ें...
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गरीबी हटाओ, गरीबी हटाओ, सभी खे साक्षर बनाओ का नारा आज देसभर में लगी रिया है, ने उनका नाम पे लोग होन अनुदान पे अनुदान लई रिया है। कुआ से खेततलक पानी आने में आदो पानी तो धरतीज रस्ता में जिरई (सोखी) लेवे, फसल अच्छी होय तो काँ से? कुआ का एरे-मेरे (आसपास) ... आगे पढ़ें...
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एक ज्ञान की बात सुणाऊँ, जरा तुम सुणता जाजो रे, रस्तऽ चखतऽ मिलऽ सबई ख तुम कहेता जाजो रे, विद्या को तो मान घणो छे, विद्या धन महान छे, विद्या बिना तो मनुसन पशु, दुदई एक समान छे, चोर नी चोरऽ एखऽ, भाई नी पाड़ऽ एमऽ वाटो रे, जेतरी खरचो दूणी बढ़ऽ, पड़ऽ नी एमऽ घाटो ... आगे पढ़ें...
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कई होयगो इना देस कोपुलिस कचरो करे केस कोदफतर-दफतर बैठ्या दलाल,अफसरज खींचे है खाल,जुवान पढ़े रस्तो ले बिदेस को,कईं होयगा इना देस को,नेता कुरछी के है तोड़े,जम्या रेवे पद नी छोड़े,चलाय तमाशो करे केश कोकईं होयगा इना देस कोगाँधी नेहरू सुभाष भगत,अमर होया, करवई ... आगे पढ़ें...
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भूक्यो नी जाणे सूक्यो-पाक्योतिस्यो नी जाणे छाण्यो-वाण्योउँघतो नी जाणे घूडो-बाडोलालची नी जाणे अपणो-परायोन्यायी नी जाणे थारो-म्हारोकपूत नी जाणे रिस्तो-विस्तोकाळ नी जाणे छोट्यो-मोट्योपरमात्म... आगे पढ़ें...
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नवो टाटो मत छाबो।जगे-जगे बुरई का जाला छवानाज्ञान का बुवारा से उने झाड़ी दो।बायर-बायर मत चमकावथोड़ो अंदर बी झाँकी लो।मनक-मनक से दूर हुई रियोप्रेमभाव का जाला झटकी लो।सगली इन्दरी सुदी चालेइना वास्ते मन पे लगाम कसी लो।मेनत करवा मे पाछे मत रोगाँठ कसी के या बाँदी ... आगे पढ़ें...
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ॐकार! जय जय कार!सरजनहार, तारणहार, पालनहार, ॐकारॐकार! जय जयकार।दिल खऽ स्वागत मंच बणायोमंगल भाव सी ओखऽ सजायोमन को मोर खुसी मऽ गावऽअभिनंदन सौ बारॐकार! जय जयकार।रेवा माँय! अज्ञान मिटइ दऽहम सबको अभिमान हटई द ऽखुलऽ ज्ञान को द्वारखुलऽ कला को द्वारॐकार! जय ... आगे पढ़ें...
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धेला भर नी ओटला की आबरू सोयड़ा बठऽ। ईट-दगड़ा ओटला का पेट मँऽ सब चोरी का। घणो उच्चो छे घमंड को ओटलो बयड़ा जसो। ओटला कऽनी इज्जत कऽ समाळ अनमोल छे। रुखड़ा जसी ओटला की औकात लोटज कुत्रा पापड़ जसो ऊँचो-नीचो ओटलो बढ़ाँतो गचऽ - गोविंद सेन आगे पढ़ें...
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सीदो सीदो चल्या करऽ। मत फोकट मऽ मर्या करऽ॥ मुश्किल सी यो जलम मिल्यो रे। अच्छा करम तु कर्या करऽ॥ खून कवं तक हमरो त्योगऽ। उप्पर वाला सी डर्या करऽ॥ चार दिन की चाँदनी छे। मत हवा मऽ उड्या करऽ॥ थारा दिन भी आई सकज रे। मत उनका पऽ हस्या करऽ॥ जिनकऽ तुनऽ कर्जो ... आगे पढ़ें...
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कसो जमानो उल्टी आयो? बरसतो पाणी रोकऽ नी धरतीसी पाणी खैचऽ बीजली का बिल सारु बर्तन-भाँडा बेचऽ धरती की खूसबू छोड़ी नऽ लगावऽ अतर को फायो। कसो जमानो उल्टो आयो... गोरा-चिकना बेटा कऽ माय-बाप का चाटऽ बाप सीधी वात कय तो घर छोड़ी नऽ न्हाटऽ मयनतसी मुँडो मोड़ऽ कर्जा मऽ ... आगे पढ़ें...
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