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टैग्स: मालवी


ब्लॉग्स (7)
प्रभु! हऊँ कईं करुँगाथारी शरणागति ली नऽम्हारा सगळा दुश्मन तो-पयलऽज शरणागत छे थारा- हृदयेश भारद्वाज आगे पढ़ें...

घर में रेवेचार मनकदो नाना,दो मोटाभेरु सुद्दा।दाड़की करेभुसांदो हुई जायबीस को आटो,पाँच की सागतेल कोनीलून-मरचलाखी ने पेट कीआग बुझाय।बीड़ी-माचिसतमाक... आगे पढ़ें...

जेठ मइना धरती असी तपऽ धाणी सेकी लऽ॥ पंस्यो ववज माथा सी पाँय तक झरऽ झिराला॥ बाप रे बाप हवा दपड़ी गई घाम देखी नऽ॥ पड्या दराड़ा घाम का आतंक सी रड़ नी फूटऽ॥ सन्नााटो छायो आतंकी घामला सी करफ्यू जसो॥ सुकई गया नद्दी-नाला-तलाव सुर्या को कोप॥ पाणी का लेणऽ तरसी रया ... आगे पढ़ें...

म्हारा सहर की बिजली, वा जो, सड़क ना पे लगी रे नी वासूर्य देवता का परकास से जले है, ने जदे सूर्यास्त हुई जावेतो वे भी बिचारी ना बुझी जावे। - नवीन बी. जोशी आगे पढ़ें...

"मालवा तथा "मालया दोनों ही शब्द हमें विभिन्न साहित्यिक स्रोतों, अभिलेखों व सिक्कों में मिलता है। पाणिनि ने "अष्टाध्यायी में मालवों का उल्लेख किया है। साथ- ही- साथ कई धार्मिक ग्रंथों, जैसे - विष्णुधर्मोत्तरपुराण... आगे पढ़ें...

हाथ में गेती ने माथा पे तगारी बाल मजूर। अबे कां करें मनक, मनक की दुःख की बात। रूप्या-पइसा भरो-पूरो परबार निराश्रत वी। बालक मांजे होटल में ठामड़ा बूढ़ा भणे हे। पेट काटीणे औलाद के भणई वो रोट नी दे। अन्ना उगाय सींचीणे परसीणो भूख ती मरे। -अशोक आनन (नईदुनिया) आगे पढ़ें...

मन के भावैलाडू पेड़ा बरफीवी बीमार छेकतरो जपाँनीजर नी आवैकाँ! भगवानझट सी रूठीघर की रामप्यारीकसौ मनावागाँव को छेगँवार नी कहलावैअँगरेजी बोलेझाड़ काटीणेउपदेश लुटावैवृक्षप्रेमी छे।-प्रदीप शर्मा (नईदुनिया) आगे पढ़ें...