- नरहरि पटेलतवा सा तमतमाता त्रास का दनतरस का तिलमिलाता प्यास का दनतवे से तमतमाते त्रास के दिनतरसते तिलमिलाते प्यास के दिनअलूणी साँझ रात खाटी हैनिठारा निरजला उपास का दनये फीकी साँझ -रात नफ़रत कीनिपट ये निरजले उपवास के दिनखाली हे कुवाँ-बावडी,खाली हे घटउखड़ती ... आगे पढ़ें...
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फुल्डा बिन्न्ती तू चली ओ लड़क्ली अपना पिताजी का बाग म ,कछु बिनय कछु बिनवा हो लाग्या एत्रा म आया दुल्ल्व रायजी ,उठो लड़क्ली बठो पाल्क्डी चलो तो आपना देस जी जंव दादाजी वर प्र्ख्से तंव जाई जावा तुमरा साथ जी ,जंव हमरा पिताजी दायजो स्न्जोव तंव जाई जावा तुमरा ... आगे पढ़ें...
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पॉँच बधावा पिया न हो गढ़ रे सुहाना हो , पॉँच बधावा जो आवत हम देख्या ........... की प्य्लो बधावो पिया न हो , ससरा घर भेजो हो ,दुसरो बधावो सहोदर बाप घर | की तिस्रो बधावो पिया न हो जेठ घर भेजो हो , चोथो बधावो सहोदर वीरा घर | की पांच्वो बधावो पिया न हो कूख ... आगे पढ़ें...
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गढ़ हो गुंडी उप्पर नौबत वाजनौब्त वाज इंदर गढ़ गाजटो झीनी झीनी झांझर वाज हो गजानन |१ जंव हो गजानन जोसी घर जाजो ,तों अच्छा अच्छा लगीं निकालो हो गजानन |गढ़ हो .....२ जंव हो गजानन बजाजी घर जाजो ,तों अच्छा अच्छा कपडा ईसावो हो गजानन |३ जंव हो गजानन सोनी घर जाजो ... आगे पढ़ें...
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सावन रा सेरा शिरू, मण म्हारो हरसाय।म्हूँ भींगा बदन तरसूं, कद पिया घर आय॥उड़ता-उड़ता बादला, पलक झपकता आय।कईं सपटनी पड़े रे, कद बरसी ने जाय॥फुहाराँ घुस के म्हारा, पीछे-पीछे आय।हात पकड़ी के सगला, घर में नाच नचाय॥बूँदा टपकी के अबे, चूमे हे रे गाल।फैल्या सिन्दूर ... आगे पढ़ें...
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नीम निंबोली पाकी जी- सावन मइनो आयोजी।उठो हो म्हारा बाला बीरा- लीलड़ी पलारोर जी।तमारी तो प्यारी बेन्या- सासरिया में झूलेगी।झूले तो झूलवा दीजो- अबके सावन आवांजी।कारे माली का छोरा- म्हारी बेन्या के देखी थी।देखी थी भई देखी थी- पाणी भरता देखी थी।हाथ में हरियालो ... आगे पढ़ें...
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डोला बण्या अकास नऽ काजल बणी वादलो छायो।उड़ी बाल की लट नऽ असी आखो मुंडो ढकायो॥चमकी कपाल उप्पर टिकी जिको फैल्यो उजालो।दपडायो साड़ी का पल्ला न चाँद मुंडो मतवालो॥चोटी मऽ फबी उठ्यो रे फुंदो लटक्यो सोभा वालो।लगऽ नाक मऽ नथनी असी दियो तिजोरी तालो॥नवली को सिणगार ... आगे पढ़ें...
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काळी वादळई खऽ भूरो वद्दळ पल्लो बाँधी लायो रेसरावण आयो रे- सरावण आयो रे- सरावण आयो रेकाळी वादळई छे नखराळीछम्म-छमाछम-छमक... आगे पढ़ें...
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रस्तऽ चलतऽ वात हुई गईमोबाइल पऽ वात हुई गईसुणी संदेसो मन हरखायोमन किलोल-कुचमात हुई गईप्यार-मिलन को वायदो हुयोतय बी टेम संगात हुई गईमन को पंछी उड्यो फड़फड़ीजाणुं वाड़ी की वाट हुई गईसपना डोला न मऽ सजायाफेरा पड्या वरात चली गईडोली इदाई की उठी गईघर जाति जमात चली ... आगे पढ़ें...
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डोरी बळई गई, पण ओको-वळ नी गयो।मसाण मऽ हाड़का गया- पणमाथा पर को सळ नी गयो।थारो-म्हारो, म्हारो-थारो करतऽ-सारी जिन्दगी गई- पणअवँऽ भी मन सी परपंच न-छळ नी गयो।दूसरा खऽ निर्मळो रहेणऽ कोपाठ पढ़ावजपण खुद का भितरऽ को-जरा सो भी, मळ नी गयो।लोग नऽ खऽ बतावज- निन्दा ... आगे पढ़ें...
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पोती बोली-दादाजी अब तम रिटायर हुई ग्या हो,नवरा हो तो घर का काम में हाथ बटाव,दादाजी बोल्या-कईं करूँ?तो तपाक से दादी बोली-नवरा हो तो बासन जमई दो,नवरा हो तो छोरा के बस स्टेंड छोड़ी आव,नवरा हो तो, कुंडा में पानी डाली दो,नवरा हो तो, बटला छीली दोनवरा हो तो, गऊँ ... आगे पढ़ें...
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प्रजातंत्र में बोल्वा को सभी खे हक ने अधिकार है। कोई भी अपनो दुखड़ो चिल्लई-चिल्लई के ने कई सके है।नाथुलालजी का छोरा खे नौकरी नी मिली री है, बिचारो हात में डिग्री लई ने नौकरी वास्ते जगा-जगा फिरी रियो है। आज भ्रष्टाचार की शिकायत लई ने नाथुलालजी नेताजी का पास ... आगे पढ़ें...
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पन्नी पन्नी थैलियों नऽ कचरा को अम्बारजगह जगह उबरईऽ रह्यो परदूषन पहारचरी चरी नऽ मरी रिया बेचारा ढोर ढंकारउजड़तो उजड़तो जईऽ रयो हर्यो भर्यो संसारसुआगत करअऽ मौत को यो सजतो तोरणद्वारपन्नी पन्नी थैलियाँ नऽ कचरा को अम्बार।लाल हरी काली धौली जगऽ जगऽ ह फैल्लीबागड़ ... आगे पढ़ें...
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प्रभु! हऊँ कईं करुँगाथारी शरणागति ली नऽम्हारा सगळा दुश्मन तो-पयलऽज शरणागत छे थारा- हृदयेश भारद्वाज आगे पढ़ें...
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थारा हाल बता तू प्यारा।उनका तो छे वारा-न्यारा।तू बी खातो मीठी कयरी,कदी अम्बो लगावता अज्या* थारा।नींद खुली नऽ सपनो टूट्यो,हवा मँऽ उडन्या रइगा नारा।दूध पेवाड़ो नऽ पुन्ना कमावो,सबई नऽ खोल्या नाग पिटारा।सड़क किनारऽ बठण्यो जोतिस,बतइ रयोज ऊ भाग हमारा।जाफा उच्चो ... आगे पढ़ें...
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